डॉक्टर सुधाकर पाण्डेय : "मेरे पापा भईया"

विचारमग्न हूँ कि जिस शख़्स का व्यक्तित्व मेरी रग-रग में बसा है, उसके बारे में क्या लिखूं? अगर लिखने बैठ जाऊं, तो पूरी डायरी भी कम पड़ेगी।

अनुज: डा. श्रवण पाण्डेय

10/10/20251 min read

सिद्धार्थ का प्यार भरा आदेश आया कि भईया के बारे में कुछ लिखकर दीजिएगा। तभी से विचारमग्न हूँ कि जिस शख़्स का व्यक्तित्व मेरी रग-रग में बसा है, उसके बारे में क्या लिखूं? अगर लिखने बैठ जाऊं, तो पूरी डायरी भी कम पड़ेगी।

जब लिखने का प्रयास किया, तो भईया का सुंदर चेहरा और प्रभावी व्यक्तित्व मेरे मन-मस्तिष्क में उतर आया। उन्होंने मुझे जीवन जीने की कला सिखाई और यह भी सिखाया कि जाति और धर्म से ऊपर उठकर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद कैसे करनी चाहिए। सिद्धार्थ, यह सबक़ शशांक और मैंने पूरी तरह आत्मसात कर लिया है।

जब मैंने इस दुनिया में आँखें खोलीं, तो सबसे पहले भईया को पाया। बाबूजी के साथ सिर्फ़ चार-पाँच वर्षों का ही साथ मिला। भईया के जाने के बाद ऐसा लगा जैसे शरीर का एक हिस्सा ही चला गया हो।

जब मैंने इस दुनिया में आँखें खोलीं, तो सबसे पहले भईया को पाया। बाबूजी के साथ सिर्फ़ चार-पाँच वर्षों का ही साथ मिला। भईया के जाने के बाद ऐसा लगा जैसे शरीर का एक हिस्सा ही चला गया हो।

मैं और मेरी पत्नी, डॉ रचना पाण्डेय, छत्तीसगढ़ में नौकरी के कारण साल में दो-तीन बार ही उनसे मिल पाते थे। लेकिन भईया के वहाँ रहने से दिलदारनगर जाने का उत्साह हमेशा बना रहता था। अब लगता है कि नौकरी की व्यस्तताओं के कारण उनके साथ बहुत कम समय बिता पाया। इस बात का दुःख हमेशा रहेगा कि काश, एक बार फिर उनके साथ समय बिता पाता। लेकिन मुझे पता है कि अब यह संभव नहीं है। अब बस उनकी यादों को दिल में संजोकर ही जी सकता हूँ।

भईया के लिए गीता का यह श्लोक पूरी तरह सटीक बैठता है:

"प्रेम मुदितमानस: प्रेम वादरत: प्रेमतत्परः l प्रेमानुरागिण: प्रेममयो भवति प्रेमामृतः।"

भईया ने हमेशा प्रेम की महत्ता को समझाया। ख़ून के रिश्तों के अलावा, समाज के अन्य लोगों के लिए भी उन्होंने दिल से प्रेम बरसाया, दिखाने के लिए नहीं, बल्कि सच्चे दिल से।

क़ुरआन की आयत 10 में भाई के प्रेम के लिए सही कहा गया है: "हे अल्लाह, मेरे भाई को मेरे लिए प्रेमी बना दे।"

उनके गाए हुए गीत 'जिंदगी में तो सभी प्यार किया करते हैं, मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा' आज भी मेरे मन-मस्तिष्क पर अंकित हैं। उनके साथ बैठने पर अक्सर मनियाँ गाँव के उनके परम मित्र नेशार भाई के चुटकुले सुनाते थे। रामचरितमानस में भगवान राम के बारे में यह श्लोक:

"राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।"

भईया के लिए चरितार्थ होता है। अब भईया को याद कर लेने से ही सुख और शांति मिलती है।

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